Posts

Showing posts from June, 2012

इ.ऍम.आई

विलाशी जीवन  का भोग I है समस्त दिलों का नारा II आमदनी है कम , तो क्या ? इ.ऍम.आई  का है मज़बूत सहारा II चंद रुपये के किस्त पर I गारी, बंगला सभी लगे प्यारा II मानो खरीदने की होर है I खरीद लाए विलाशी वास्तु सारा II इ.ऍम.आई  से  मिली  आज़ादी ने I सचेत  सोच  को  है मारा II लालसा बराबरी के दबाव में I ज़रुरत का है रूप धारा II उसी आमदनी में I जटिल  होता मनोरम  गुजारा II उधारी से नहीं विलासिता I भूल गए यह विचार धारा II