जीवन संग्राम कहानी I है बहुत पुरानी II कष्ट और परेशानी I भोगे प्रत्येक प्राणी II समझौतों की जुबानी I इच्छाओं की क़ुरबानी II करे पीढ़ा तूफानी I ऐ मूर्ख अहंमानी II विवाद होंगे मोहिनी I कष्ट होगी चाँदनी II चाहत को रानी I बना निरीह प्राणी II
नशे का शौक नहीं l खोजता हूँ खुशिया वही ll इसलिए तन्हाईओं में बैठ, पीता हूँ l उन यादों को याद कर जीता हूँ ll उन यादों को याद कर जीता हूँ l हाथों में शराब लिए मुस्कुराता हूँ ll ये शराब जब सीने में जाती है l यादें तस्वीर बनकर सामने आती है ll
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