अज़ादी
देख पक्षी अम्बर में I
शेर ज़ोर से गुर्राता है II
गुर्राहट सुन निरीह पक्षी I
डर से सहम जाता है II
अपार कोशिश कर के भी I
भयभीत उड़ ना पाता है II
निर्मम शेर के समीप I
अघात फड फडाता है II
शक्ति का दिखावा कर I
डरे को डराता है II
यहाँ बादशाह मैं हूँ I
अहंमानी स्मरण कराता है II
खुबसूरत उड़ान भरते हो I
केह शेर दुम हिलाता है II
राज़ मुझे भी बताओ I
पूछ मदहोश गुर्राता है II
कौन सी राज़ बताए I
व्याकुल समझ ना पाता है II
अपने हालात को देख I
असहाय निराश हो जाता है II
उड़ान की खूबसूरती का I
रहस्य बोल ना पाता है II
निर्बल निरंकुश के सामने I
चुप चाप रेह जाता है II
अन्ना, बाबा और कई I
देश भर चिंगारी जलाता है II
गलत-सही सही-गलत कर I
निरंकुश राज्नितिग्ये धौस जताता है II
आज़ादी के पंख पहने I
भारत उड़ ना पाता है II
राज्नितिग्ये के पंजों में I
ये उदास फड फडाता है II
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