इ.ऍम.आई


विलाशी जीवन  का भोग I
है समस्त दिलों का नारा II
आमदनी है कम , तो क्या ?
इ.ऍम.आई  का है मज़बूत सहारा II
चंद रुपये के किस्त पर I
गारी, बंगला सभी लगे प्यारा II
मानो खरीदने की होर है I
खरीद लाए विलाशी वास्तु सारा II
इ.ऍम.आई  से  मिली  आज़ादी ने I
सचेत  सोच  को  है मारा II
लालसा बराबरी के दबाव में I
ज़रुरत का है रूप धारा II
उसी आमदनी में I
जटिल  होता मनोरम  गुजारा II
उधारी से नहीं विलासिता I
भूल गए यह विचार धारा II

Comments

  1. lalsa barabari ke dabav mein, jarurat ka hai rup dhara...

    too good piyus da!!

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